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विपक्ष की रैली से दिल्ली के व्यापारियों को 11,000 करोड़ रुपये का नुकसान, 80 प्रतिशत दुकानें रहीं बंद: CTI

 Written By: Sunil Chaurasia
 Published : Nov 02, 2026 11:40 am IST,  Updated : Nov 02, 2026 11:40 am IST

बृजेश गोयल ने कहा कि राजधानी में कई दिनों से डर, अनिश्चितता और ट्रैफिक प्रतिबंधों का माहौल बना हुआ था, जिसका सीधा असर बाजारों और व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ा।

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राहुल गांधी ने रामलीला मैदान में आयोजित हुई विपक्षी पार्टियों की रैली का नेतृत्व किया था Image Source : IANS

व्यापारी संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने बताया कि रामलीला मैदान में आयोजित विपक्षी पार्टियों की रैली की वजह से दिल्ली के व्यापारियों को करीब 11,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने दावा किया कि इस रैली के कारण लगभग 80 प्रतिशत दुकानें बंद रहीं। सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि रैली से पहले बड़े पैमाने पर प्रचार किया गया था कि करीब 10 लाख लोग इसमें शामिल होंगे। अनुमान था कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों को लाने के लिए लगभग 15,000 से 20,000 गाड़ियां आएंगी। नतीजतन, पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में भय और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ था। 

बाहर से दिल्ली आने वाले लोगों की संख्या में भारी गिरावट

बृजेश गोयल ने कहा कि राजधानी में कई दिनों से डर, अनिश्चितता और ट्रैफिक प्रतिबंधों का माहौल बना हुआ था, जिसका सीधा असर बाजारों और व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ा। न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में गोयल ने कहा कि सामान्य दिनों में दिल्ली के बाजारों में खरीदारी और कारोबार के लिए रोजाना 3 से 4 लाख लोग बाहर से आते हैं, लेकिन रैली वाले दिन उनकी संख्या बेहद कम रही।

रैली की वजह से शाम तक बंद रहीं 2.5 लाख दुकानें

उन्होंने कहा, "रामलीला मैदान के आसपास के 22 से 25 प्रमुख बाजारों में करीब 3 लाख दुकानें हैं। अलग-अलग बाजार संघों से मिली जानकारी के आधार पर सीटीआई का अनुमान है कि शाम तक लगभग 2.5 लाख दुकानें, यानी करीब 80 प्रतिशत दुकानें बंद रहीं। जो दुकानें खुली भी थीं, वहां कारोबार लगभग न के बराबर रहा।"

सीटीआई ने राहुल गांधी को लिखी 4 चिट्ठियां

इससे पहले बृजेश गोयल ने कहा था कि सीटीआई ने रैली से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी को 4 बार चिट्ठी लिखकर कार्यक्रम स्थगित करने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा कि करीब 100 प्रमुख बाजार संगठनों ने भी यही मांग उठाई थी, लेकिन इसका कोई राजनीतिक मकसद नहीं था। उन्होंने कहा, "हम व्यापारी हैं, किसी राजनीतिक दल के एजेंट नहीं। हमारा काम व्यापार है, राजनीति नहीं। हम केवल दिवाली सीजन में अपनी आजीविका बचाने की अपील कर रहे थे।"

उन्होंने राहुल गांधी की उस अपील का भी स्वागत किया, जिसमें उन्होंने रैली में शामिल लोगों से दिल्ली के बाजारों में खरीदारी कर व्यापारियों का समर्थन करने को कहा था। हालांकि गोयल का कहना है कि जमीनी हालात अलग थे। उनके मुताबिक जब बड़ी संख्या में दुकानें बंद रहीं, तो रैली में पहुंचे लोग खरीदारी कैसे कर सकते थे।

माल ढुलाई और सप्लाई चेन पर भी पड़ा बुरा असर

सीटीआई का दावा है कि रैली के कारण केवल बाजारों में ग्राहकों की संख्या ही प्रभावित नहीं हुई, बल्कि माल ढुलाई और सप्लाई चेन पर भी बुरा असर पड़ा। गोयल ने कहा कि रामलीला मैदान के 10 किलोमीटर के दायरे में ट्रांसपोर्ट गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुईं। माल की लोडिंग और अनलोडिंग का काम लगभग ठप रहा।

उन्होंने बताया कि सामान्य तौर पर नरेला, बवाना, ओखला, मायापुरी, मुंडका और उद्योग नगर सहित दिल्ली के 56 औद्योगिक क्षेत्रों से प्रतिदिन करीब 5000 ट्रक और टेंपो माल लेकर बाजारों में पहुंचते हैं। लेकिन रैली के दिन सप्लाई चेन बाधित होने से धनतेरस और दिवाली के लिए तैयार सामान गोदामों में ही अटका रहा और दुकानों तक नहीं पहुंच सका।

व्यापारियों का कहना है कि धनतेरस और दिवाली से पहले का समय साल का सबसे महत्वपूर्ण सीजन होता है, ऐसे में किसी भी तरह की रुकावट का असर पूरे साल की कमाई पर पड़ता है।

IANS Inputs

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